Wednesday, February 24, 2016

मेरा बचपन मुझे बड़ा होने नहीं देता !!

हर बात पर एक पुरानी याद का वास्ता देता है मुझे,  
मेरा बचपन मुझे बड़ा होने नहीं देता !

न जाने कितने मौसम बदले , 
जाने क्यों लोग इतने बदल गए 
बदल गए हैं सब चेहरे भी अब 
न जाने सब नक़ाब कहा फिसल गए !

हर पल उन् पुराने चेहरों की हसीं 
मुस्कान मुझे भुलाने नहीं देता 
मेरा बचपन मुझे बड़ा होने नहीं देता !

कभी आँगन में गूंजती किलकारियां मेरी, 
कभी गलियारों में दौड़ते कदम, 
कभी झूला झूलने की ज़िद्द मेरी  
वो खेल खेलते लुका चुप्पी के हम !

जो स्वाद चीनी संग रोटी में था  
उसे बर्गर में तलाश रहा हु मैं  
जो सुकून मिटटी के बने मकानों में था  
वो इन ऊंची इमारतों में तलाश रहा हु मैं  
बारिश में कागज़ की कश्ती का मज़ा  
इन् पक्की सड़कों में नहीं  
बेफिक्री से जीने का मज़ा  
वीकेंड की पार्टी  में  नहीं 

हर एक याद कभी धुनधलाने नहीं देता  
मेरा बचपन मुझे बड़ा होने नहीं देता !

जीना आसान था उस उम्र में  
जब फ़िक्र सिर्फ homework की थी  
जब न whatsapp के मोहताज थे हम  
न ज़रूरत किसी selfie की थी 

जब दोस्तों के चेहरे देखना  
Facebook से ज़्यादा ख़ास था    
घूमने के लिए साइकिल थी अपनी  
रास्ता भी था छोटा, पहोचना भी पास था !

साथ जाने की ज़िद्द थी तब  
Check-in जब न सुना था हमने, 
फोटो खींचने पर स्माइल किया करते थे  
Pout तोह मछली को करते सुना था हमने 

पैसे की किल्लत में थी जो ऐश 
उसका लुत्फ़ ही कुछ और था  
सस्ती थी ज़रूरते भी हमारी 
न महंगाई का वो दौर था !

इन अनगिनत यादों का  एक  
गुलदस्ता कभी मुरझाने नहीं देता  
हर एक याद कभी धुनधलाने नहीं देता  


मेरा बचपन मुझे बड़ा होने नहीं देता !!!
मेरा बचपन मुझे बड़ा होने नहीं देता !!!