उड़ने की कोशिश करता वो पंछी,
बिलकुल मेरी तरह छटपटाता है,
टूटे पंख घिसट घिसट कर,
फिर उड़ान की हिम्मत जुटाता है,
न जाने कितनी बार गिरा है,
ये भूल फिर छलांग लगता है |
उड़ने की कोशिश करता वो पंछी,
बिलकुल मेरी तरह छटपटाता है ||
ये शांत सा लगता समंदर,
जलती रेत पर मेरे कदमो को जो सहलाता है,
अंदर उतरते ही न जाने,
क्यों उग्र सा हो जाता है ?
क्यों बीच मझदार पा कर मुझे
बाहर धकेलना चाहता है ?
मैं ज़ोर लगाता हूं जितना,
वो उतना ही मुझे थकाता है |
जैसे, कोई हवा का झोंका सा हो |
जो उस पंछी को तड़पाता है,
हवाओं से लड़ता झगड़ता,
वो उड़ने की आस लगाता है,
उड़ने की कोशिश करता वो पंछी,
बिलकुल मेरी तरह छटपटाता है ||
गर पंख होते तो मैं भी कहीं,
दूर उड़ जाता दुनिया से मेरी,
ये ख्याल कई बार आया है मुझे |
तोड़ ये पिंजरे झमेलों के सारे,
दूर उड़ जाता दुनिया से मेरी,
ये ख्याल कई बार आया है मुझे |
पर दर्द उसका भी तो बड़ा है,
पंख ले भी वो वही पड़ा है,
थक गया है वो मुझ जैसे ही,
पर वो भी मुझ जैसा ही ढीट बड़ा है |
टूटे रिश्तो से पंख लिए,
फिर एक बार वो मनन बनाता है,
टूटे पंख घिसट घिसट कर,
फिर उड़ान की हिम्मत जुताडा है,
न जाने कितनी बार गिरा है,
ये भूल फिर छलांग लगता है |
उड़ने की कोशिश करता वो पंछी,
बिलकुल मेरी तरह छटपटाता है ||
बिलकुल मेरी तरह छटपटाता है,
टूटे पंख घिसट घिसट कर,
फिर उड़ान की हिम्मत जुटाता है,
न जाने कितनी बार गिरा है,
ये भूल फिर छलांग लगता है |
उड़ने की कोशिश करता वो पंछी,
बिलकुल मेरी तरह छटपटाता है ||
ये शांत सा लगता समंदर,
जलती रेत पर मेरे कदमो को जो सहलाता है,
अंदर उतरते ही न जाने,
क्यों उग्र सा हो जाता है ?
क्यों बीच मझदार पा कर मुझे
बाहर धकेलना चाहता है ?
मैं ज़ोर लगाता हूं जितना,
वो उतना ही मुझे थकाता है |
जैसे, कोई हवा का झोंका सा हो |
जो उस पंछी को तड़पाता है,
हवाओं से लड़ता झगड़ता,
वो उड़ने की आस लगाता है,
उड़ने की कोशिश करता वो पंछी,
बिलकुल मेरी तरह छटपटाता है ||
गर पंख होते तो मैं भी कहीं,
दूर उड़ जाता दुनिया से मेरी,
ये ख्याल कई बार आया है मुझे |
तोड़ ये पिंजरे झमेलों के सारे,
दूर उड़ जाता दुनिया से मेरी,
ये ख्याल कई बार आया है मुझे |
पर दर्द उसका भी तो बड़ा है,
पंख ले भी वो वही पड़ा है,
थक गया है वो मुझ जैसे ही,
पर वो भी मुझ जैसा ही ढीट बड़ा है |
टूटे रिश्तो से पंख लिए,
फिर एक बार वो मनन बनाता है,
टूटे पंख घिसट घिसट कर,
फिर उड़ान की हिम्मत जुताडा है,
न जाने कितनी बार गिरा है,
ये भूल फिर छलांग लगता है |
उड़ने की कोशिश करता वो पंछी,
बिलकुल मेरी तरह छटपटाता है ||