Friday, July 28, 2017

दिखावा करते हैं

मेरी मोहब्बत का जनाज़ा निकला है आज, 
आओ चलते हैं।
दुनिया के लिए ही सही, चलो दिखावा करते हैं। 

मेरे रेहनुमा बस तुम ही हो, 
सबको गुमां यूं है।। 

धोका ही तोह है।। 
आओ फिरसे करते हैं। 

      दुनिया के लिए ही सही, चलो दिखावा करते हैं।। 

क्या ही रक्खा है सही गलत में, 
सब बेकार का यह हो हल्ला है।

आखिर,, 
सच्चाई ही तोह है।। 
चलो झूठा साबित करते हैं। 

आँखें नीची क्यू कर निकलें। 
गुनाहगार साबित हम हुए कहाँ हैं? 

अरे,, 
इल्ज़ाम ही तोह है।। 
किसी और पर मढ़ते हैं।


      दुनिया के लिए ही सही, चलो दिखावा करते हैं।।

ये जो सभी सयाने बने बैठे हैं,
इनकी भी हालत हम सी ही है।
इन्ही से सीख कर आज,
इनकी ही आँखों में धूल भरते हैं।
जो सब कर रहे हैं,
हम तुम भी कर गुज़रते हैं।

       दुनिया के लिए ही सही, चलो दिखावा करते हैं।।


ये सारे सिद्धांत यूं ही धरे रह जाएंगे
इन्हे उन्ही सयानो संग रहने दो।।
कुछ चटक भी गए तोह गुनाह क्या है?? 
हम तुम काफिर बन पड़ते हैं।। 

शोर करीब आ रहा है सुनो।।
अब इस भीड़ में शामिल हो निकलते हैं।। 
 
ये मेरी ही, मोहब्बत का जनाज़ा निकला है आज,
आओ चलते हैं।
दुनिया के लिए ही सही, चलो दिखावा करते हैं।

Friday, July 14, 2017

चलो हम फिर अजनबी बन जाएँ

छोड़ो ये दिखावे में तारीफें करना,
आओ हम भी कुछ सच कह जाएँ।
आज फिर एक बार ये दुनियादारी भुला,
चलो हम फिर अजनबी बन जाएँ।

सब किससे पुराने संजो हमारे,
चलो यादों की एक पोटली बनाएं।
उसी में डाल देंगे सब शिकवे गिले,
चलो दूर कहीं फिर छोड़ उसको आएं।

पुराने ज़ख्मों को अब कुरेदना छोड़ो,
आओ नयी चोट अब दिल पे खाएं।
कब तक छुपाए रखेंगे आखिर ?
चलो अब फिर दिल से हम ज़नजीरें हटाएं।

चलो हम फिर अजनबी बन जाएँ।

हम सोच सब पहले ही लेंगे,
क्यूँ बाद में हालआत को फिर गुनहगार बताएं?
लिख लेते हैं अभी से सवाल सारे,
चलो फिर बैठ इत्मीनान से जवाब बनाएं।

कुछ यूं करो इस बार,

तुम फेक दो वो सब कीताबें पुरानी,
जिनमें गलतियाँ दर्ज़ कर रक्खी थी मेरी।
हम क्यूँ कर अब उनका बोझा उठाएं ?
फिर शुरू से गिनती कर,
चलो गल्तीओं की नयी फैरिस्त बनाएं।

और इस बार कोई गलती न दोहराना,
चलो हम भी कुछ नई खताएं कर जाएं।
न हो सको तुम नाउम्मीद मुझसे,
चलो इस बार हम उम्मीदएं ही न लगाएं।

चलो हम फिर अजनबी बन जाएँ I

अपनी पुरानी पहचान मिटा,
राब्ता हम तुम फिरसे बनाएं।
इस बार दूसरी ओर चलेंगे,
नए रास्तों पर चलो नयी ठोकरें खाएं।

कोई रश्क पुराना न लेके तुम दिल में चलना,
चलो नई नफरतों की अब नई दीवारें चढ़ाएँ।

छोड़ो ये दिखावे में तारीफें करना,
चलो हम फिर अजनबी बन जाएँ ।
चलो हम फिर अजनबी बन जाएँ ।