Saturday, December 5, 2015

जब ज़िन्दगी की दौड़ भुला

जब ज़िन्दगी की दौड़ भुला  
एक सांस लेने मैं रुका, 
दे तेरी साँसों का सिला
मुझे फिर ज़िन्दगी ने दौड़ा दिया!!

भूल बीते दिन के किस्सों को मैं, 
कल की सोच में जो खोने लगा, 
पर ये भी न गवारा था ज़िन्दगी तुझे, 
जो फिर इत्तिहास मुझे रटा दिया 

जब ज़िन्दगी की दौड़ भुला  
एक सांस लेने मैं रुका, 
दे तेरी साँसों का सिला
मुझे फिर ज़िन्दगी ने दौड़ा दिया!!

जब आज को ही सीने से लगा  
मैं कल क ख्वाबो में डूबा था ! 
उन् ख्वाबो की कोशिश ने ही 
मुझे नींद से जगा दिया !


मैं आँखें मूँद चलता रहा , 
जिस ओर तू खींचें चली , 
जब आँख उठा देखा तो जाना , 
तूने फिर उसी मोड़ पर पहोंचा दिया !!

जब ज़िन्दगी की दौड़ भुला  
एक सांस लेने मैं रुका, 
दे तेरी साँसों का सिला
मुझे फिर ज़िन्दगी ने दौड़ा दिया!!

To be with you

Itna kuch mohabatt aur romance pe likha ja chuka hai k ab kuch naya krne ki gunjaish nahi milti!

Still I'll try


To be with you or to not be
Kabhi agr ye khayal bhi mujhe aaega
Toh faisla kaafi asaan hoga mera 
Jab zindagi bhar k liye thaama h haath
Toh tera saath chhodna be-imaan hoga mera!

Mushkilein, patthar ,kaaton si baatein 
Ye sab toh raste mein milne hi hain  
Mushkilo ko langh kr hi toh 
Manzil ko salaam hoga mera
Jab saath nikle hain humsafar bnke 
Toh humsafar ban hi rasta tamaam hoga mera

To be with you or to not be
Ye savaal bhi khudse mazaak hai 
Chahe halaat kaise bhi palat jaye
Unse ladd k hi toh ishq parwaan hoga mera


Har mod par imtehaan hoga mera
Par har imtehaan mein saath tu bhi hoga 
Har baar paar ho hi jaenge hum 
Tere saath toh nakal krna bhi asaan hoga mera

It's been and It'll always be there 
A life worth living again 
Coz you've been and you'll always be there!

To be with you or to not be
I know if it'll ever cross your mind 
Toh faisla mujhse bhi asaan hoga tera

ग़ुलाम

काश कभी ऐसा हो जाये ! 
मैं वक़्त का नहीं , 
वक़्त मेरा ग़ुलाम हो जाये ! 
मेरे चलने संग वो चलने लगे  
मेरे रुकने पे थम जाए .

हर मुश्किल कितनी आसान होगी 

गर हस्ती मेरी कुछ ऐसी हो जाये  
जो आज उसके इशारों पे थिरकती है ज़िन्दगी
वो खुद मेरे इशारों का ग़ुलाम होजाये 

मैं उठु तो सुबह की धूप भी खिलने लगे  

मेरी आँख लगते ही हसीं शाम होजाये !

सब कहते हैं वक़्त बलवान बड़ा हैं 

ये वक़्त ही है  जो सबकी राह में खड़ा हैं  

वो साथ हो तो हर बात बन पड़ती हैं 

वो बिगड़ जाये तो हर कदम पे लड़ा हैं | 

मैं सोचता हू ज़िन्दगी में कितना, 

मुझे सुकून-ए-आराम होजाये 
जो अपनी धुन पर नचाता है सबको 
उसकी, मेरी ताल को अगर सलाम होजाये  
जिसे सब कहते है बलवान बड़ा है  
उससे मेरी शख्सियत जो बलवान होजाये


काश कभी ऐसा हो जाये! 

मैं वक़्त का नहीं, 
वक़्त मेरा ग़ुलाम हो जाये!

किताब ज़िन्दगी की मेरी

गर लिखी गई किताब ज़िन्दगी की मेरी,
तो कुछ पन्ने तुमहारे भी होंगे उसमें |


वो पलछिन कैद होंगे उनमें, 
कुछ महक यादों की होगी, 
तस्वीर हमारे बीते कल की,  
जो अल्फाज़ो में रंगी होगी |


जिनमें छिपे होंगे वो अनगिनत पल, 
जिन्हें लव्ज़ों में न मैं कह सका |
ये पल जो हम जी रहे है साथ,
कल वही उसमें अतीत होंगे, 
ज़िन्दगी जो गुनगुनाते बीत गयी, 
कल वही उसमें मेरे गीत होंगे |

गर लिखी गई किताब ज़िन्दगी की मेरी,
तो कुछ पन्ने तुमहारे भी होंगे उसमें |


जो मेरा आज है,  
कल वही इतिहास होगा उसमें,
साथ रह कर जो महसूस किया मैंने,
कल वही एहसास होगा उसमें |

न जाने कितनी दास्ताँ होंगी छिपी  
न जाने कितने किस्से कैद होंगे 
कुछ अच्छे, 
कुछ बुरे, 
कितने सपने पुराने भी होंगे उसमें | 

गर लिखी गई किताब ज़िन्दगी की मेरी,
तो कुछ पन्ने तुमहारे भी होंगे उसमें ||