Sunday, January 8, 2017

आज फिर वह किस्सा, वह कहानी और वही बात है

आज फिर वह किस्सा, वह कहानी और वही बात है,
जिसे छोड़ पीछे दौड़े थे आगे,
फिर हो रही आज वही मुलाकात है,
दौड़ते दौड़ते फिर वहीँ आगये,
की जहा से यह शुरुवात है,
आज फिर वह किस्सा, वह कहानी और वही बात है|

दूसरी ही ओर निकला था मैं,
के इस बार दूसरा अंजाम हो|
जहां फिर न बस रास्ते में फस के रह जाऊं,
इस बार मंज़िल को मेरी पहचान हो|

पर,

मेरे कदमो तले घूमती ये दुनिया,
फिर ला उस मोड़ पे देगी,
जहा फिर वह लोग, वह भीड़ और वही नक़ाब ओड़े चेहरों की जमात है|

आज फिर वह किस्सा, वह कहानी और वही बात है...

फिर वह शोर, वह सन्नाटा और वही तन्हा सी रात है,
जहाँ फिर एक तरफ मैं और सामने खड़े जज़्बात हैं,
कुछ खुद में रोता मैं और मुझपे हस्ते ये हालात हैं |

कुछ नहीं बदला है आज भी,
थी तब भी बस एहि परछाई मेरी
आज भी बस यही मेरे साथ है

आज फिर वह किस्सा, वह कहानी और वही बात है,
जिसे छोड़ पीछे दौड़े थे आगे,
फिर हो रही आज वही मुलाकात है,
दौड़ते दौड़ते फिर वहीँ आगये,
की जहा से यह शुरुवात है