Saturday, December 5, 2015

किताब ज़िन्दगी की मेरी

गर लिखी गई किताब ज़िन्दगी की मेरी,
तो कुछ पन्ने तुमहारे भी होंगे उसमें |


वो पलछिन कैद होंगे उनमें, 
कुछ महक यादों की होगी, 
तस्वीर हमारे बीते कल की,  
जो अल्फाज़ो में रंगी होगी |


जिनमें छिपे होंगे वो अनगिनत पल, 
जिन्हें लव्ज़ों में न मैं कह सका |
ये पल जो हम जी रहे है साथ,
कल वही उसमें अतीत होंगे, 
ज़िन्दगी जो गुनगुनाते बीत गयी, 
कल वही उसमें मेरे गीत होंगे |

गर लिखी गई किताब ज़िन्दगी की मेरी,
तो कुछ पन्ने तुमहारे भी होंगे उसमें |


जो मेरा आज है,  
कल वही इतिहास होगा उसमें,
साथ रह कर जो महसूस किया मैंने,
कल वही एहसास होगा उसमें |

न जाने कितनी दास्ताँ होंगी छिपी  
न जाने कितने किस्से कैद होंगे 
कुछ अच्छे, 
कुछ बुरे, 
कितने सपने पुराने भी होंगे उसमें | 

गर लिखी गई किताब ज़िन्दगी की मेरी,
तो कुछ पन्ने तुमहारे भी होंगे उसमें ||

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