गर लिखी गई किताब ज़िन्दगी की मेरी,
तो कुछ पन्ने तुमहारे भी होंगे उसमें |
वो पलछिन कैद होंगे उनमें,
कुछ महक यादों की होगी,
तस्वीर हमारे बीते कल की,
जो अल्फाज़ो में रंगी होगी |
जिनमें छिपे होंगे वो अनगिनत पल,
जिन्हें लव्ज़ों में न मैं कह सका |
ये पल जो हम जी रहे है साथ,
कल वही उसमें अतीत होंगे,
ज़िन्दगी जो गुनगुनाते बीत गयी,
कल वही उसमें मेरे गीत होंगे |
गर लिखी गई किताब ज़िन्दगी की मेरी,
तो कुछ पन्ने तुमहारे भी होंगे उसमें |
जो मेरा आज है,
कल वही इतिहास होगा उसमें,
साथ रह कर जो महसूस किया मैंने,
कल वही एहसास होगा उसमें |
न जाने कितनी दास्ताँ होंगी छिपी
न जाने कितने किस्से कैद होंगे
कुछ अच्छे,
कुछ बुरे,
कितने सपने पुराने भी होंगे उसमें |
गर लिखी गई किताब ज़िन्दगी की मेरी,
तो कुछ पन्ने तुमहारे भी होंगे उसमें ||
तो कुछ पन्ने तुमहारे भी होंगे उसमें |
वो पलछिन कैद होंगे उनमें,
कुछ महक यादों की होगी,
तस्वीर हमारे बीते कल की,
जो अल्फाज़ो में रंगी होगी |
जिनमें छिपे होंगे वो अनगिनत पल,
जिन्हें लव्ज़ों में न मैं कह सका |
ये पल जो हम जी रहे है साथ,
कल वही उसमें अतीत होंगे,
ज़िन्दगी जो गुनगुनाते बीत गयी,
कल वही उसमें मेरे गीत होंगे |
गर लिखी गई किताब ज़िन्दगी की मेरी,
तो कुछ पन्ने तुमहारे भी होंगे उसमें |
जो मेरा आज है,
कल वही इतिहास होगा उसमें,
साथ रह कर जो महसूस किया मैंने,
कल वही एहसास होगा उसमें |
न जाने कितनी दास्ताँ होंगी छिपी
न जाने कितने किस्से कैद होंगे
कुछ अच्छे,
कुछ बुरे,
कितने सपने पुराने भी होंगे उसमें |
तो कुछ पन्ने तुमहारे भी होंगे उसमें ||
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