Tuesday, November 29, 2016

इंसान नहीं हालात सही या गलत होते हैं

जब कभी बीते पलों को याद करता हूं,
तब समझ आता है,
                                    इंसान नहीं हालात सही या गलत होते हैं |

हम यूँ ही किसी के फैसले से खफा
न जाने कब तक गलतफहमियों का बोझ ढोते हैं,
काश उसी वक़्त समझ लेते हम कि,
                                    इंसान नहीं हालात सही या गलत होते हैं |


उसका हर कदम ज़रूरी नहीं,
मेरी ओर ही बड़े |
सफर जब ज़िन्दगी भर लंबा हो,
तोह कई बार रास्ते अलग होते हैं,
पर एक  रोज़ फिर मिल जाएंगी राहें,
क्योंकि
                                    इंसान नहीं हालात सही या गलत होते हैं |

फैसले इंसान के नहीं,
मजबूरी का अक्स होते हैं |
फैसले से फासलों के आने का डर,
हम न जाने क्यों मजबूरी में ढोते हैं
मजबूरी कि भी तोह वजह
सदा हालात होते हैं

इस सब में फसे हम कभी करीब,
तोह ग़ुमशुदा किसी वक़्त होते हैं ,

                                    इंसान नहीं हालात सही या गलत होते हैं |

गर समझ भी पहले लिया ये होता
शायद सुलझी हुई होती दुनिया
न बात के गलत मायने निकलते
न बीच सफर यूँ रस्ते बदलते
न परेशां होते अपनी
सचाई जताने कि ज़िद्द में यूँ,
जिस तरह बेचैन हम फ़क्त होते हैं

                                    इंसान नहीं हालात सही या गलत होते हैं |

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