जब कभी बीते पलों को याद करता हूं,
तब समझ आता है,
इंसान नहीं हालात सही या गलत होते हैं |
हम यूँ ही किसी के फैसले से खफा
न जाने कब तक गलतफहमियों का बोझ ढोते हैं,
काश उसी वक़्त समझ लेते हम कि,
इंसान नहीं हालात सही या गलत होते हैं |
उसका हर कदम ज़रूरी नहीं,
मेरी ओर ही बड़े |
सफर जब ज़िन्दगी भर लंबा हो,
तोह कई बार रास्ते अलग होते हैं,
पर एक रोज़ फिर मिल जाएंगी राहें,
क्योंकि
इंसान नहीं हालात सही या गलत होते हैं |
फैसले इंसान के नहीं,
मजबूरी का अक्स होते हैं |
फैसले से फासलों के आने का डर,
हम न जाने क्यों मजबूरी में ढोते हैं
मजबूरी कि भी तोह वजह
सदा हालात होते हैं
इस सब में फसे हम कभी करीब,
तोह ग़ुमशुदा किसी वक़्त होते हैं ,
इंसान नहीं हालात सही या गलत होते हैं |
गर समझ भी पहले लिया ये होता
शायद सुलझी हुई होती दुनिया
न बात के गलत मायने निकलते
न बीच सफर यूँ रस्ते बदलते
न परेशां होते अपनी
सचाई जताने कि ज़िद्द में यूँ,
जिस तरह बेचैन हम फ़क्त होते हैं
इंसान नहीं हालात सही या गलत होते हैं |
तब समझ आता है,
इंसान नहीं हालात सही या गलत होते हैं |
हम यूँ ही किसी के फैसले से खफा
न जाने कब तक गलतफहमियों का बोझ ढोते हैं,
काश उसी वक़्त समझ लेते हम कि,
इंसान नहीं हालात सही या गलत होते हैं |
उसका हर कदम ज़रूरी नहीं,
मेरी ओर ही बड़े |
सफर जब ज़िन्दगी भर लंबा हो,
तोह कई बार रास्ते अलग होते हैं,
पर एक रोज़ फिर मिल जाएंगी राहें,
क्योंकि
इंसान नहीं हालात सही या गलत होते हैं |
फैसले इंसान के नहीं,
मजबूरी का अक्स होते हैं |
फैसले से फासलों के आने का डर,
हम न जाने क्यों मजबूरी में ढोते हैं
मजबूरी कि भी तोह वजह
सदा हालात होते हैं
इस सब में फसे हम कभी करीब,
तोह ग़ुमशुदा किसी वक़्त होते हैं ,
इंसान नहीं हालात सही या गलत होते हैं |
गर समझ भी पहले लिया ये होता
शायद सुलझी हुई होती दुनिया
न बात के गलत मायने निकलते
न बीच सफर यूँ रस्ते बदलते
न परेशां होते अपनी
सचाई जताने कि ज़िद्द में यूँ,
जिस तरह बेचैन हम फ़क्त होते हैं
इंसान नहीं हालात सही या गलत होते हैं |
No comments:
Post a Comment